तुलसी के फायदे – श्रद्धा और विश्वास रखने से असर जल्दी और अधिक होता हैं..

जब हम किसी शारीरिक कष्ट का अनुभव करते हैं तो हमको औषधियों की याद आ जाती थी,पर आजकल उनकी जगह टेबलेट, मिक्चर, इंजेक्शन, कैप्सूल ने ले ली हैं। तुलसी बहुत बड़ी औषधियों में से एक हैं। यह एक नही सैकड़ो रोगों में लाभ पहुचाती हैं।

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धीरे धीरे तुलसी के स्वास्थ्य प्रदायक गुण और सात्विक प्रभाव के कारण उसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गईं कि लोग उसे भक्ति भाव की दृष्टि से देखने लगे और पूजा करने लगे। इस प्रकार तुलसी की उपयोगिता और भी अधिक बढ़ गयी।
जिस वस्तु का प्रयोग श्रद्धा और विश्वास के साथ होता है, उसका प्रभाव बहुत जल्दी और अधिक देखने को मिलता हैं ।

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खांसी और जुखाम

  • साधारण खांसी में तुलसी के पत्ते और अडूसा के पत्तो का रस बराबर में मिलाकर लेने से जल्दी लाभ होता हैं ।
  • कुकर खांसी में तुलसी और अदरक को बराबर ले कर पीसकर शहद में मिलाकर चाटे।
  • तुलसी का रस और मुलहठी का सत मिलाकर चाटने से खांसी ठीक होती हैं।
  • तुलसी और कसोदी की पत्ती का रस मिलाकर सेवन करने से खांसी में लाभ होता है।
  • चार पांच लौंग भूनकर तुलसी पते के साथ लेने से सब तरह की खांसी ठीक हो जाती हैं।
  • तुलसी पत्र , हल्दी और कालीमिर्च से बनाये गए काढ़े से जुखाम और हरारत में लाभ होता हैं।

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आँख, नाक और कानों के रोग

  • तुलसी का रस निकाल कर आँखों मे आँजने से आँखों की पीड़ा और अन्य रोग दूर होते हैं।
  • आँखों मे सूजन और खुजली की शिकायत होने पर तुलसी पत्तो का काढ़ा बना कर उसमे थोड़ी सी फिटकरी पीसकर मिला दे । जब काढ़ा गुनगुना रहे तभी रुई से पलको को सेके। 5-5 मिनट में 2 बार सेंकने से सूजन कम हो जाती हैं।
  • अगर कान में दर्द हो तो तुलसी का रस जरा सा गुनगुना करके कान में टपकाने से आराम मिलता हैं।
  • अगर नाक के भीतर दर्द हो या किसी तरह का जुखाम और फुंसी हो गयी हो तो तुलसी के पत्तो को बारीक पीस कर सूंघने से आराम मिलता हैं।

पुरुषो के वीर्य और मूत्र संबंधी रोग

  • तुलसी की जड़ को बारीक पीसकर सुपाड़ी की जगह पान में रखकर खाया जाये तो वीर्य पुष्ट होता है और स्तंभन शक्ति बढती हैं।
  • तुलसी के बीज या जड़ का चूर्ण पुराने गुड़ में मिलाकर 3 महीने प्रतिदिन दूध के साथ लेने से पुरूषत्व की वृद्धि होती हैं।
  • मूत्र दाह की शिकायत में पाव भर दूध और डेढ़ पाव पानी मिलाये और उसमें 2 3 तोला तुलसी के पत्तो का रस डालकर पी जाये।
  • रात को तुलसी के बीज पानी मे भिगो कर रखे और सुबह उसको ठंडाई की तरह पी जाएं। इसके लगातार सेवन से प्रमेह, मूत्र- कुच्छ में लाभ होता हैं।

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स्त्रियों के रोग

  • स्त्रियों के मासिक धर्म रुकने पर तुलसी के बीजों का प्रयोग लाभदायक होता हैं।
  • मासिक धर्म के होने पर तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर 3 दिन तक पी लिया जाए तो गर्भ स्थापना की संभावना कम हो जाती हैं।
  • गर्भवती स्त्री की छाती और पेट की खुजली के लिए तुलसी के बीजों का लेप करने से आराम मिलता हैं।
  • गर्भावस्था में पेट के अधिक बढ़ जाने पर पेट पर जो दरार सी पड़ जाती है और जिसमे कभी कभी खुजली होती है, वो तुलसी के पत्तों को मलने से ठीक हो जाती हैं।
  • प्रसव के समय तीव्र वेदना होने पर तुलसी का रस पिलाने से लाभ होता है और बच्चे के बाहर निकलने में सुविधा होती हैं।

बच्चो के रोग

  • बच्चो का पेट फूलने पर तुलसी का रस पिलाने से आराम मिलता हैं।
  • दांत निकलते समय बच्चों को जोर से दस्त लग जाते है उसमें तुलसी के पत्तों का चूर्ण अनार के शर्बत में देना लाभदायक होता हैं।
  • बच्चों को सर्दी और खांसी की शिकायत होने पर तुलसी का रस देने से आराम मिलता हैं।

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फोड़ा, घाव और चर्म रोग

  • तुलसी के पत्तों को गंगाजल में पीसकर निरंतर लगाने से सफ़ेद दाग कुछ समय में ठीक हो जाते हैं।
  • बालतोड़ पर तुलसी के पत्ते और पीपल के पत्तो को पीसकर लगाने से आराम मिलता हैं।
  • नाक के भीतर फुंसी हो जाने पर तुलसी की पत्ते और बेर को पीसकर सूँघने और लगाने से लाभ होता हैं।
    तुलसी के पत्तों को नीबू के रस में मिलाकर लगाने से दाद दूर हो जाते हैं।
  • तुलसी और नीम के पत्तो को दही में पीसकर लगाने से भी दाद ठीक हो जाते हैं।

दांतो की पीड़ा

  • दांतो में दर्द होने पर तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च पीसकर गोली बनाकर दर्द के स्थान पर रखने से आराम मिलता हैं।
  • तुलसी के पंचाग को कूटकर पानी मे पकाये। आधा पानी हो जाते पर उससे कुल्ला करें, दांतो का दर्द मिट जाता हैं।

सिर दर्द

  • सिर दर्द में तुलसी के सूखे पत्तों का चूर्ण और तुलसी के बीज का चूर्ण सूँघने से आराम मिलता हैं।
  • वन तुलसी का फूल और कालीमिर्च को जलते कोयले पर डालकर उसका धुँआ सूँघने से सिर दर्द ठीक हो जाता हैं।
  • श्यामा तुलसी की जड़ को चंदन की तरह घिसकर लेप लगाने से दर्द मिटता हैं।

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गठिया और जोड़ों का दर्द

  • तुलसी के पत्तो का रस पीते रहने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता हैं।
  • वन तुलसी के पंचाग को पानी मे उबाल कर उसका भफारा लेने से लकवा और गठिया में लाभ होता हैं।

सब प्रकार के ज्वर

  • जुकाम के कारण आने वाले ज्वर में तुलसी के पत्तो का रस पीने से आराम मिलता हैं।
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