नाग पंचमी : नागों की स्वतंत्र पूजा न करें।

नाग पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है।  आज 15 अगस्त के दिन नागपंचमी है। श्रवण शुक्ल पंचमी तिथि को नागों की पूजा का पर्व नागपंचमी मनाया जाता है। इस तिथि को भगवान शिव के आभूषण नागों की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है।  नाग पंचमी पर खास संयोग बन रहा है। 20 साल बाद बेहद शुभ योग बन रहा है। आज चंद्रमा कन्या राशि और अपने हस्त नक्षत्र में हैं। अत: जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष है, उनके लिए आज शिव पूजन करना जरूरी और बेहद शुभ है।

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नाग पंचमी (Nag Panchami) के दिन शिव शंकर के साथ ही साथ नाग देवता की पूजा की जाती है नाग से जुड़ी फिल्मों की बात की जाये तो बॉलीवुड में ऐसी कई मूवी बन चुकी है, जिनके नाम नाग या नागिन से हैं या फिर गानों में इसका जिक्र किया गया है ।

अगर कुंडली में राहु केतु की स्थिति ठीक न हो तो भी इस दिन विशेष पूजा से लाभ पाया जा सकता है। सर्प के सपने आते हों या सर्प से भय होता हो तो भी इस दिन नागों की पूजा विशेष अनुकूल होती है।

शास्त्रों में नागों के बारे में कहा गया है कि जो नाग अपने मुख में विष को धारण करते हैं, वे व्यक्ति को लक्ष्मी के समान धनवान बनाने की क्षमता रखते हैं।

कहते हैं जिस जमीन के अंदर नागों का बसेरा रहता हो, उस जमीन के ऊपर घर बनाकर रहने से लक्ष्मी माता की कृपा सदैव बनी रहती है। इसका कारण बताया जाता है कि ऐसी जमीन के ऊपर बने घरों में किसी भी तरह का वास्तुदोष नहीं रहता है।

किस प्रकार करें नागपंचमी पर सामान्य पूजा उपासना?

– प्रातःकाल स्नान करके भगवान शिव का स्मरण करें । पहले भगवान शिव का अभिषेक करें, उन्हें बेलपत्र और जल अर्पित करें। फिर शिवजी के गले में विराजमान नागों की पूजा करें। नागों को हल्दी, रोली, चावल और फूल अर्पित करें, इसके बाद चने, खील बताशे और कच्चा दूध अर्पित करें।

नागपंचमी पर पूजा के समय क्या सावधानियां रखें ?

– बिना शिव जी की पूजा के कभी भी नागों की पूजा न करें। नागों की स्वतंत्र पूजा न करें, उनकी पूजा शिव जीके आभूषण के रूप में ही करें।

– जो लोग भी नागों की कृपा पाना चाहते हों, उन्हें इस दिन न तो भूमि खोदनी चाहिए और न ही साग काटना चाहिए.

अगर राहु केतु से परेशान हों तो इस दिन क्या उपाय करें ?

– एक बड़ी सी रस्सी में सात गांठें लगाकर प्रतीकात्मक रूप से सर्प बनाएं। इसे एक आसन पर स्थापित करें। अब कच्चा दूध, बताशा, फूल अर्पित करें साथ ही गुग्गल की धूप जलाएं । राहु के मंत्र “ॐ रां राहवे नमः” तथा केतु के मंत्र “ॐ कें केतवे नमः” का जाप करें। इसके बाद एक-एक करके रस्सी की गांठें खोलते जाएं। अब रस्सी को बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।

अगर सर्प से बहुत ज्यादा भय लगता हो या या सर्प के बहुत ज्यादा सपने आते हों तो ये उपाय करें-

– चांदी के दो सर्प बनवाएं साथ में एक स्वस्तिक बनवाएं। एक थाल में रखकर नागों की पूजा करें और एक थाल में स्वस्तिक की पूजा करें। नागों को कच्चा दूध और स्वस्तिक को बेलपत्र अर्पित करें। “ॐ नागेन्द्रहाराय नमः” का जाप करें। नागों को शिव लिंग पर अर्पित करें, तथा स्वस्तिक को गले में धारण कर लें।

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